Sunday, 23 September 2018

यादों में

पल की भी फुर्सत नहीं
पर खाली पन इतना
जैसे कुछ किया नहीं
होता है ऐसा अक्सर
जब दिल को तसल्ली मिलती नहीं
कुछ ऐसा करो जो मन को भाता हो
उसके लिए समय निकाला करो
कभी पल भर अपने पे गुज़ारा करो
कम की कोई कमी नहीं जितना चाहो उतना करो
पर कुछ ऐसा भी करो
जिसे याद कर मन को खुशी मिले
और यादें हो ऐसी इतनी
की यादों में जीना चाहो तो जी सके।


मुमकिन

उमर ढलती है
शरीर साथ नहीं देता
चाहत तो कायम रहती है

याद करो बचपन ओर यौवन
जब शरीर तंदरुस्त था
दिमाग शरारतो में मशरूफ था
कल जब आयेगा कर लेंगे मेहनत
आज तो मनमानी कर लें ज़रा

कल कल करते बुडापा आ गया
बहुत कुछ करना चाहते थे
सो धरा ही रह गया

जो है अपने पास उसी में तसल्ली करो
बुढापे को ही जननत में बदल दो
जब चाहत है मन में ओर हौसला है दिल में
सब कुछ मुमकिन है कर के तो देखो।

Writer

Shyness keeps them reserved
they don t talk much
and don't appear comfortable
among strangers as well as friends

they don t open up but are keen observants
and notice every word said
or any gesture or move made

when they start to write
they give life to words
and to every emotion and feeling
there is power in their expression

What they can t say in public
they put it into writing
and feel like strangers in this
world
but in their words is their own world

they are just like tortured souls
who tell their own stories
in verse or prose
which becomes literature!

Friday, 21 September 2018

छोटी बातें

नफरत से जो आग लगाए
वो खुद जले साथ
प्यार से तो दिल पिगलें
और भुजे आग

कोन अपना कोन पराया
जाने ना कोई
अंत समय जो काम आए
सो ही अपना होय

दोस्तों का पूछते रहो हाल
कोई तो हो अपना भी
जो याद करे अपने आप

कल और आज मै फरक है
होना भी चाहिए
कुदरत भी साथ देती है
इरादे नेक होने चाहिएं

सोच में डूबे रहने से काम नहीं बनते
घर से बाहर तो निकलना पड़ता है
कुछ पाने के लिए।

मॉं बाप की सेवा

सेवा तो पूजा है
और मा बाप की सेवा
उससे भी ऊपर है

हालात होते है कभी ऐसे
मा बाप से दूर होते हैं बच्चे
सेवा का मौका नही मिलता

सेवा भाव है अगर मन में
मा बाप है सबके
सेवा करो उनकी
और दुआ करो इतनी
कि अपने मा बाप तक पहुंचे

और कभी पास होते भी
दूर होते है बच्चे
सेवा तो करनी है
प्यार से या जबरदस्ती

सेवा तो पूजा है
करो इसे जैसे भी
पर प्यार में जो सुकून है
वो कहीं और नही ।

मायूसी

बस ऐसे ही चलती है जिंदगी
कोइ हालात से मजबुर हैं
कोइ अपनी आदतों से
चलती रहे किसी तरह
कोशिश तो इतनी करते हैं
आर पार से क्या बनता है
फिर शुरू से वही होता है
ना अपनी चलती है
चला कर भी क्या करना है
दो सांस ले लूं शांति से
फिर जैसे भी हो जीना है।

दिल की चोट

दिल और ज़ुबान का क्या अनोखा रिश्ता है
कभी ज़ुबान से निकली बात दिल को चुब ही जाती है
कभी दिल बहुत कुछ झेल जाता है
किसी की ज़ुबान पर जाए या ना जाए
यह समझना भी जरूरी है
करवा घूट भी पीना पड़े अगर तो ज़रा सम्हल के
कि दिल की चोट गहरी होती है ।